Wednesday, August 20, 2008

Kuch juda aehsas...

Frnz i wrote dis poem after undergoing heart rendering horrifying nd shameful first hand experiences of dis heineous crime ie. female foeticide during my internship period...a lot of people used come nd undergo ultrasounds nd den they will nvr return..
i hv heard of it earlier but wen i found dat how deep rooted it is in our society....well lets not dicuss here it goes..


मैं एक अजन्मी बच्ची हूँ..
मैं जानती हूँ मेरा कल क्या होगा..
मैं जानती हूँ मुझे कदम कदम पर खतरा होगा..
मैं जानती हूँ मुझे कम खाना कम पीना होगा..
मैं जानती हूँ मुझे अनपढ़ रहना होगा..
मैं जानती हूँ मुझे बारह की उम्र में शादी की चक्की में पिसना होगा..
मैं जानती हूँ चौदह की उम्र में मुझे प्रसव पीडा को सहना होगा..
मैं एक अजन्मी बच्ची हूँ........
मैं जानती हूँ मुझे दहेज़ की आग में जलना होगा..
मैं जानती हूँ मुझे हर जुल्म के आगे बिछना होगा..
मैं जानती हूँ मुझे जीते जी सैकडों बार मरना होगा..
मैं एक अजन्मी बच्ची हूँ...
लेकिन मैं पैदा होना चाहती हूँ..
मैं तुम्हारी दुनिया में आना चाहती हूँ..
हर जोर ज़ुल्म से टकराना चाहती हूँ..
मेरे जन्म से पहले मुझे मत मारो..
मेरे धूमिल भविष्य को ऐसे तो न संवारो..
मैं एक अजन्मी बच्ची हूँ...
मुझसे इस कद्र खौफ न खाओ..
मुझे अपनी दुनिया में आने दो..
मैं पैदा होना चाहती हूँ..
मैं एक अजन्मी बच्ची हूँ..

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अंकिता..

1 comment:

Kuch Roshan Khyaal....kuch haseen khwaab.. said...

hey one of my frnd said dat its too tragic..nd y shud be agony exposed like dis ..jst to make a good poem..well i did not think of makin a gud poem at the time of writing it..
but wud like to know abt ur version..